Key takeaways
What this article covers, in order:
- क्यों यह सवाल आता है / समस्या क्या होती है
- स्टेप-बाय-स्टेप
- उदाहरण (काल्पनिक आंकड़े)
- आम गलतियां
- HelloBooks में ई-इनवॉइस जनरेटिंग
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ई-इनवॉइस जनरेट करना आज के GST नियमों के तहत जरूरी हो गया है, खासकर उन व्यवसायों के लिए जिनका कारोबार ₹5 करोड़ से ऊपर है। छोटे व्यवसायी अक्सर इस प्रक्रिया को लेकर उलझन में रहते हैं कि कैसे सही और नियमों के अनुसार ई-इनवॉइस बनाएं।
क्यों यह सवाल आता है / समस्या क्या होती है
छोटे और मध्यम व्यवसायी जिनके पास अभी तक पारंपरिक बिलिंग सिस्टम जैसे Excel, Tally या कागजी बिल होते हैं, उनके लिए ई-इनवॉइस की प्रक्रिया नई और जटिल लगती है। खासकर GSTIN, HSN/SAC कोड, CGST/SGST/IGST के सही विवरण भरना, IRN प्राप्त करना और QR कोड जनरेट करना कई बार गलत हो जाता है। इससे GST रिटर्न फाइलिंग और ITC क्लेम में दिक्कत होती है। इसलिए हर स्टेप को समझना जरूरी है ताकि बिना गलती के ई-इनवॉइस तैयार किया जा सके।
स्टेप-बाय-स्टेप
- ग्राहक और सप्लायर की जानकारी भरें:
- सप्लायर का नाम, पता, GSTIN
- ग्राहक का नाम, पता, GSTIN या UIN (यदि रजिस्टर्ड है)
- यदि ग्राहक अनरजिस्टर्ड है और बिल ₹50,000 से ऊपर है तो उसका नाम, पता और डिलीवरी एड्रेस भी भरें।
- इनवॉइस नंबर और तारीख दर्ज करें:
- एक लगातार चलने वाला यूनिक इनवॉइस नंबर (16 कैरेक्टर तक) और इनवॉइस की तारीख डालें।
- माल या सेवा के विवरण भरें:
- HSN कोड (माल के लिए) या SAC कोड (सेवा के लिए)
- वस्तु या सेवा का वर्णन
- मात्रा और यूनिट
- मूल्य निर्धारण और छूट:
- कुल मूल्य
- छूट (यदि लागू हो)
- टैक्सेबल वैल्यू (कुल मूल्य - छूट)
- GST दर और कर राशि भरें:
- CGST, SGST/UTGST या IGST की दर और राशि
- सेस (यदि लागू हो)
- स्थान और डिलीवरी विवरण:
- सप्लाई का स्थान और राज्य का नाम
- डिलीवरी का पता यदि अलग हो
- रिवर्स चार्ज की जानकारी:
- यदि टैक्स रिवर्स चार्ज के अंतर्गत आता है तो उसकी जानकारी दें
- डिजिटल सिग्नेचर या हस्ताक्षर:
- सप्लायर या अधिकृत प्रतिनिधि का सिग्नेचर या डिजिटल सिग्नेचर
- ई-इनवॉइस पोर्टल पर सबमिट करें:
- तैयार इनवॉइस को e-invoice पोर्टल पर JSON फॉर्मेट में अपलोड करें या बिलिंग सॉफ्टवेयर के जरिए IRN जनरेट करें
- IRN और QR कोड प्राप्त करें जो इनवॉइस में एम्बेड होगा
- इनवॉइस को PDF में सेव और भेजें:
- IRN और QR कोड के साथ इनवॉइस PDF बनाएं
- ग्राहक को भेजें और रिकॉर्ड रखें
इन स्टेप्स को समझने के लिए आप HelloBooks के GST invoicing और e-invoicing (IRN and QR) फीचर्स का उपयोग कर सकते हैं जो इन प्रक्रियाओं को आसान बनाते हैं।
उदाहरण (काल्पनिक आंकड़े)
मान लीजिए, मुंबई स्थित एक व्यवसायी ने 15 मार्च 2024 को बेंगलुरु के एक रजिस्टर्ड ग्राहक को माल बेचा। विवरण इस प्रकार है:
- सप्लायर का नाम: ABC ट्रेडर्स
- सप्लायर GSTIN: 27AAEPM1234F1Z2
- ग्राहक का नाम: XYZ कॉर्पोरेशन
- ग्राहक GSTIN: 29AAACX1234D1Z5
- इनवॉइस नंबर: INV0001
- HSN कोड: 1001 (मान लीजिए)
- माल की मात्रा: 10 यूनिट
- प्रति यूनिट मूल्य: ₹5,000
- कुल मूल्य = 10 × ₹5,000 = ₹50,000
- कोई छूट नहीं
- टैक्सेबल वैल्यू = ₹50,000
- CGST दर: 9%, SGST दर: 9%
टैक्स की गणना:
₹50,000 × 9% = ₹4,500 (CGST)
₹50,000 × 9% = ₹4,500 (SGST)
कुल कर = ₹4,500 + ₹4,500 = ₹9,000
कुल राशि = ₹50,000 + ₹9,000 = ₹59,000
अब इस इनवॉइस को e-invoice पोर्टल या HelloBooks में सबमिट करें। IRN और QR कोड प्राप्त होने पर PDF बनाएं और ग्राहक को भेजें।
आम गलतियां
- गलत या अधूरा GSTIN भरना:
- हमेशा GSTIN की सही जांच करें। गलत GSTIN से IRN जनरेट नहीं होगा।
- HSN/SAC कोड गलत दर्ज करना:
- माल या सेवा के लिए सही HSN/SAC कोड चुनें। इसके लिए GST invoice validator का उपयोग करें।
- इनवॉइस नंबर में गड़बड़ी:
- लगातार और यूनिक नंबरिंग रखें। दोहराव से बचें।
- टैक्स दरों की गलत गणना:
- CGST, SGST और IGST की सही दरें लगाएं। अलग-अलग राज्यों के लिए IGST लगाना होता है।
- QR कोड और IRN न लेना:
- ₹5 करोड़ से ऊपर के कारोबार में IRN लेना जरूरी है। IRN के बिना इनवॉइस वैध नहीं माना जाएगा।
- डिलीवरी एड्रेस और सप्लाई प्लेस में अंतर न बताना:
- यदि डिलीवरी एड्रेस अलग है तो उसे सही भरें।
HelloBooks में ई-इनवॉइस जनरेटिंग
HelloBooks में आप GST इनवॉइस बना सकते हैं जो CGST/SGST या IGST का सही विभाजन करता है और HSN/SAC कोड ग्राहक के GSTIN से ऑटोमेटिक भरता है। ₹5 करोड़ से ऊपर के कारोबार के लिए HelloBooks ई-इनवॉइस (IRN और साइन किया हुआ QR) जनरेट करता है, जिससे आपको पोर्टल पर JSON अपलोड करने की जरूरत नहीं पड़ती। इसके साथ ही, ई-वे बिल भी उसी इनवॉइस से बना सकते हैं, जिससे कंसाइनमेंट की डिटेल्स दोबारा टाइप नहीं करनी पड़ती। अधिक जानकारी के लिए देखें HelloBooks for India।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ई-इनवॉइस के लिए कौन-कौन से व्यवसायी जिम्मेदार हैं?
जो व्यवसायी ₹5 करोड़ से अधिक का टर्नओवर रखते हैं, उन्हें B2B सप्लाई के लिए ई-इनवॉइस जनरेट करना अनिवार्य है। कुछ विशेष छूट वाले व्यवसायी इस नियम से मुक्त हो सकते हैं, पर उन्हें पोर्टल पर छूट का दावा करना होता है।
क्या B2C इनवॉइस के लिए भी ई-इनवॉइस जरूरी है?
नहीं, वर्तमान में ई-इनवॉइस नियम B2B सप्लाई पर लागू है। B2C इनवॉइस के लिए यह अनिवार्य नहीं है।
ई-इनवॉइस में IRN और QR कोड क्या होता है?
IRN (Invoice Reference Number) एक यूनिक नंबर होता है जो GST पोर्टल से मिलता है। QR कोड में यह IRN एम्बेड होता है, जिससे इनवॉइस की वैधता आसानी से चेक की जा सकती है।
क्या मैं Excel या Tally से ई-इनवॉइस जनरेट कर सकता हूँ?
हाँ, लेकिन आपको JSON फॉर्मेट में इनवॉइस पोर्टल पर अपलोड करना होगा या HelloBooks जैसे सॉफ्टवेयर का उपयोग करना होगा जो यह प्रक्रिया आसान बनाता है।
क्या ई-इनवॉइस जनरेट होने के बाद इसे रद्द किया जा सकता है?
हाँ, GST पोर्टल द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर आप IRN के साथ ई-इनवॉइस को कैंसिल कर सकते हैं।
मुख्य बातें
- ई-इनवॉइस जनरेट करने के लिए सप्लायर और ग्राहक की सही जानकारी जरूरी है।
- HSN/SAC कोड, GST दर और टैक्स की सही गणना करें।
- ₹5 करोड़ से ऊपर के कारोबार के लिए IRN और QR कोड अनिवार्य हैं।
- लगातार और यूनिक इनवॉइस नंबरिंग रखें।
- HelloBooks जैसे सॉफ्टवेयर से ई-इनवॉइस बनाना और ई-वे बिल जनरेट करना आसान होता है।
ई-इनवॉइस जनरेट करना अब आपके व्यवसाय के लिए आसान हो सकता है। आप HelloBooks पर जाकर Start on the Free plan (200 transactions a year, GSTR-1 and 3B filing for one GSTIN) से शुरुआत कर सकते हैं।

